1. नन्दिनी वंश (गोमाता वंश)
महर्षि कश्यप की धर्मपत्नी 'सुरभी' से 'गौ' (जिन्हें गोमाता भी कहा गया) का जन्म हुआ। इन्हीं के वंशज आगे चलकर इतिहास में 'नन्दिनी वंश' के नाम से विख्यात हुए।
ऐतिहासिक प्रमाण: इनके मूल निवास को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है, लेकिन प्रसिद्ध यूनानी इतिहासकार हेरोडोटस के लेखों में इस वंश के संकेत मिलते हैं।
ईरान से संबंध: प्राचीन ईरान के 'मेदिया' क्षेत्र (जिसे मीडिया भी कहा जाता है) के निवासी इसी गोमाता वंश के माने जाते थे। भारतीय पुराणों में इसी स्थान को 'मद्र' या 'मग' देश कहा गया है।
भारत में नन्दिनी वंश: प्राचीन साक्ष्यों के अनुसार, भारत में यह समुदाय महर्षि वशिष्ठ के राज्य में प्रजा के रूप में निवास करता था। पुराणों में जिसे "नन्दिनी गाय का झगड़ा" कहा गया है, उसे ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो यह नन्दिनी वंश के लोगों द्वारा विश्वामित्र और राजा सत्यव्रत (त्रिशंकु) के विरुद्ध किया गया एक भीषण युद्ध था।
2. श्रापद जाति
इस वंश की उत्पत्ति कश्यप पत्नी 'सरभा' से हुए पुत्र 'श्रापद' से मानी जाती है। यद्यपि पुराणों में यदा-कदा इनका नाम आता है, लेकिन इनके वंश विस्तार का बहुत अधिक लिखित विवरण अभी उपलब्ध नहीं है।
3. यदोगण (यहु वंश)
कश्यप जी की पत्नी 'तिमि' से 'यदो' (या यहु) नामक पुत्र की उत्पत्ति हुई।
रोचक तथ्य: कुछ विद्वानों का मत है कि कालांतर में यही 'यदो' या 'यहु' वंशज 'यहूदी' कहलाए। इसका प्रमाण यह भी है कि यहूदियों का प्राचीन स्थान 'कश्यप सागर' (जिसे आज कैस्पियन सागर कहते हैं) के पास ही स्थित था। कुछ पौराणिक आख्यानों में इनके देवों में विलीन होने के संकेत भी मिलते हैं।
4. सूर्य वंश (आदित्य वंश)
यह सबसे प्रतिष्ठित वंश माना जाता है। महर्षि कश्यप की पत्नी 'अदिति' के गर्भ से 'आदित्य' (सूर्य) का जन्म हुआ। इन्हीं से महान सूर्यवंश की नींव पड़ी, जिसने भारतवर्ष को अनेक प्रतापी राजा दिए। (सूर्यवंश का विस्तृत इतिहास हम अगले भाग में जानेंगे)।
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