सूर्यवंशी (अर्कवंशी) क्षत्रियों का इतिहास त्याग, बलिदान और शौर्य की एक ऐसी गाथा है जो सदियों से भारतवर्ष को आलोकित कर रही है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस वंश के पूर्वज और वंशज साक्षात भगवान सूर्य नारायण (अर्क देवता) के उपासक रहे हैं और उन्हें ही अपना कुलदेवता मानते हैं। 'अर्क' का अर्थ है सूर्य, और इसी तेज को धारण करने वाले क्षत्रिय 'अर्कवंशी' कहलाए।
1. सत्य और वचन के पक्के: रघुकुल की रीत
इस महान वंश की नींव सत्य और धर्म पर टिकी है।
प्रभु श्री राम: इसी सूर्यवंश (अर्कवंश) में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम ने जन्म लिया, जिन्होंने अपने पिता के वचन को निभाने के लिए राजपाट त्याग दिया और 14 वर्षों का वनवास स्वीकार किया।
महाराजा हरिश्चंद्र: इसी वंश में सत्यवादी महाराजा हरिश्चंद्र हुए, जिन्होंने सत्य के मार्ग पर चलते हुए अपना संपूर्ण राज्य, धन और परिवार तक दान कर दिया, लेकिन धर्म नहीं छोड़ा।
2. साम्राज्य विस्तार और प्रतापी शासक
इतिहास के हर कालखंड में अर्कवंशी राजाओं ने अपनी प्रजा की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगाई।
महाराजा तिलोकचंद अर्कवंशी: इन्होंने इंद्रप्रस्थ (वर्तमान दिल्ली) पर शासन किया और सत्य मार्ग पर चलते हुए साम्राज्य का विस्तार किया।
अन्य महान शासक: इस वंश की कीर्ति बढ़ाने वाले राजाओं की सूची लंबी है। महाराजा विक्रमचंद, महाराजा मानकचंद, महाराजा रामचंद, महाराजा हरि चंद, महाराजा कल्याण चंद, महाराजा भीमचंद, महाराजा लोकचंद और महाराजा गोविन्द चंद अर्कवंशी जैसे वीरों ने अपने शौर्य से इस वंश को सुशोभित किया।
महारानी भीमा देवी अर्कवंशी: क्षत्रिय वीरांगनाओं में महारानी भीमा देवी का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है, जिन्होंने कठिन संघर्षों के बीच साम्राज्य की बागडोर संभाली और समाज को नई दिशा दी।
3. संडीला और मलिहाबाद के संस्थापक: दो भाई, दो रियासतें
अर्कवंशी इतिहास का मध्यकाल दो महाप्रतापी भाइयों की वीरता का साक्षी है— महाराजा सल्हीय सिंह अर्कवंशी (बड़े भाई) और महाराजा मल्हीय सिंह अर्कवंशी (छोटे भाई)।
संडीला (हरदोई): बड़े भाई महाराजा सल्हीय सिंह ने संडीला में अपना साम्राज्य स्थापित किया। आज भी पुराने डाक बंगले के पास स्थापित उनकी प्रतिमा उनकी वीरगाथा सुना रही है।
मलिहाबाद (लखनऊ): छोटे भाई महाराजा मल्हीय सिंह ने मलिहाबाद को अपनी राजधानी बनाया और वहां अर्कवंशी ध्वज फहराया।
निष्कर्ष:
सूर्यवंशी (अर्कवंशी) क्षत्रिय सदैव अपनी प्रजा की रक्षा के लिए तत्पर रहे। चाहे वनवास हो, बलिदान हो या युद्ध का मैदान—यह वंश हमेशा सत्य के मार्ग पर अडिग रहा। हमें गर्व है अपने इन पूर्वजों पर।
।। जय सूर्यदेव ।। जय अर्कवंश ।।
Gaharwar rajpooot ke upar koi list banaie
ReplyDeleteGaharwar rajpooot suryavanshi rajpooot hai
I am arkhvanshi
ReplyDeletethanks you very much brother! I feel proud to read my arkvansh history
ReplyDeletemujhe kotbar samaj ka pura ithihas chahiye kirpya karke meri madad kare
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