संपूर्ण जगत में भगवान शिव के समान कोई नहीं है। उनकी उपासना से बढ़कर कोई उपासना नहीं और उनके मंत्रों से बढ़कर कोई मंत्र नहीं। मनुष्य जीवन की सार्थकता तभी है जब वह शिव की भक्ति में समर्पित हो जाए। भगवान शिव 'भोलेनाथ' हैं, वे भाव के भूखे हैं। जिस व्यक्ति ने शिव को प्रसन्न कर लिया, उसके लिए संसार में कुछ भी अप्राप्य नहीं रहता।
शिव षडाक्षरी मंत्र की महिमा (ॐ नमः शिवाय)
भगवान शिव का 'षडाक्षरी मंत्र' (ॐ नमः शिवाय) सर्वश्रेष्ठ और सर्वशक्तिशाली है।
इस मंत्र के जप से आध्यात्मिक विकास होता है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
शिव साधक के आगे संसार के सभी भोग और ऐश्वर्य नतमस्तक रहते हैं।
शिव योगी सदैव निरोगी रहता है और पूर्ण आयु भोगकर शिवलोक को प्राप्त होता है।
विशेषकर प्रदोष तिथि पर शाम और रात के समय शिव पूजन और इस मंत्र का जाप परम फलदायी माना गया है।
श्री शिव षडाक्षर स्तोत्रम्
(धूप और दीप जलाकर इस अद्भुत स्तोत्र का पाठ करें)
ॐ कार बिन्दुसंयुक्तं नित्यं ध्यायंति योगिन:।
कामदं मोक्षदं चैव ऊँकाराय नमो नम:।।
नमंति ऋषयो देवा नमन्त्यप्सरसां गणा:।
नरा नमंति देवेशं नकाराय नमो नम:।।
महादेव महात्मानं महाध्यानं परायणम्।
महापापहरं देव मकाराय नमो नम:।।
शिवं शातं जगन्ननाथं लोकानुग्रहकारकम्।
शिवमेकपदं नित्यं शिकाराय नमो नम:।।
वाहनं वृषभो यस्य वासुकि: कंठभूषणम्।
वामे शक्तिधरं वेदं वकाराय नमो नम:।।
यत्र तत्र स्थितो देव: सर्वव्यापी महेश्वर:।
यो गुरु : सर्वदेवानां यकाराय नमो नम:।।
षडक्षरमिदं स्तोत्रं य: पठेच्छिवसंनिधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते।।
सरल और प्रामाणिक शिव पूजन विधि
भगवान शिव अत्यंत दयालु हैं। वे श्रद्धा मात्र से प्रसन्न हो जाते हैं। गृहस्थ जीवन में 'पारद शिवलिंग', 'स्फटिक' या 'सफेद आक' की प्रतिमा का पूजन सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
1. संकल्प:
हाथ में जल, फूल और चावल लें। वर्ष, वार, तिथि, स्थान और अपना नाम बोलकर अपनी मनोकामना कहें और जल जमीन पर छोड़ दें।
2. गणेश पूजन:
सर्वप्रथम श्री गणेश जी को स्नान कराएं, वस्त्र, गंध और पुष्प अर्पित करें।
3. शिव पूजन (क्रमवार):
आवाहन: 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः आव्हानयामि स्थापयामि' (चावल चढ़ाएं)।
आसन: 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः आसनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि' (फूल चढ़ाएं)।
पाद्यं (पैर धुलाना): 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः पादयो: पाद्यं समर्पयामि'।
अर्घ (हाथ धुलाना): 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः हस्तयोः अर्घं समर्पयामि'।
आचमन (मुख शुद्धि): 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः आचमनीयम् जलं समर्पयामि'।
स्नान: पहले 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः पंचामृत स्नानं समर्पयामि' (पंचामृत से) फिर 'शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि' (शुद्ध जल से)।
वस्त्र व गंध: 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः वस्त्रोपवस्त्रम् समर्पयामि' (वस्त्र) और 'गन्धं समर्पयामि' (चंदन)।
बिल्वपत्र व पुष्प: 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः बिल्वपत्रं समर्पयामि' (बेलपत्र) और 'पुष्पं समर्पयामि' (आक/धतूरा)।
अक्षत: 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः अक्षताम् समर्पयामि' (साबुत चावल)।
धूप-दीप: 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः धूपम् आघर्पयामि' और 'दीपम् दर्शयामि'।
नैवेद्य (भोग): 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः नेवैद्यम् निवेदयामि' (मिठाई/फल/पंचमेवा)।
ताम्बूल (पान): 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः तांबूल समर्पयामि'।
आरती व परिक्रमा: धूप-दीप से आरती करें और 'ऊँ साम्ब शिवाय नमः प्रदक्षिणा समर्पयामि' बोलकर आधी परिक्रमा करें।
क्षमा प्रार्थना: अंत में पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए महादेव से क्षमा मांगें।
प्रेम से बोलो... ॐ नमः शिवाय!
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