Sunday, May 22, 2022

🔆 जानिए सूर्य देव के जन्म की कथा और 12 चमत्कारी मंत्रों के लाभ

सूर्य देव इस पृथ्वी के सबसे साक्षात देवता हैं, जिनके हमें प्रतिदिन प्रत्यक्ष दर्शन होते हैं। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है, जो समस्त चराचर जगत का अविनाशी कारण और जीवन का आधार हैं। वैदिक काल से ही भारत में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है।
ज्योतिष शास्त्र में सूर्यदेव को नवग्रहों का राजा माना गया है। मान्यता है कि यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्यदेव शुभ फल दें, तो उसका समाज में यश और सम्मान बढ़ता है, तथा उसे पिता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

🌅 कैसे हुई सूर्य देव की उत्पत्ति? (पौराणिक कथा)
मार्कंडेय पुराण के अनुसार, सूर्य देव की उत्पत्ति की कथा इस प्रकार है:
प्रथम उत्पत्ति: पहले यह सम्पूर्ण जगत प्रकाश रहित था। कमलयोनि ब्रह्मा जी प्रकट हुए, जिनके मुख से प्रथम शब्द 'ॐ' निकला। यही 'ॐ' सूर्य का तेज रूपी सूक्ष्म रूप था। तत्पश्चात ब्रह्मा जी के चार मुखों से चार वेद प्रकट हुए, जो 'ॐ' के तेज में एकाकार हो गए। यह वैदिक तेज ही आदित्य है, जो विश्व का अविनाशी कारण है।

अवतार रूप में जन्म: सृष्टि रचना के समय ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि हुए, जिनके पुत्र ऋषि कश्यप का विवाह अदिति से हुआ।
अदिति ने घोर तप द्वारा भगवान् सूर्य को प्रसन्न किया।
सूर्य ने अदिति की इच्छा पूर्ति के लिए सुषुम्ना नाम की किरण से उसके गर्भ में प्रवेश किया।
गर्भावस्था में भी अदिति चान्द्रायण जैसे कठिन व्रतों का पालन करती थी।

मार्तंड नाम: ऋषि कश्यप ने क्रोधित होकर अदिति से पूछा कि वह उपवास रखकर गर्भस्थ शिशु को क्यों मारना चाहती है। यह सुनकर देवी अदिति ने गर्भ के बालक को उदर से बाहर कर दिया। शिशु का अत्यंत दिव्य तेज प्रज्वल्लित हो रहा था। अदिति को मारिचम-अन्डम कहा जाने के कारण यह बालक मार्तंड नाम से प्रसिद्ध हुआ।

ब्रह्मपुराण के अनुसार: ब्रह्मपुराण में अदिति के गर्भ से जन्मे सूर्य के अंश को विवस्वान कहा गया है।
✨ सूर्य देव के 12 चमत्कारी मंत्र और उनके लाभ
सूर्य देव ऐसे देवता हैं जिन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी बड़े अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इन्हें प्रातःकाल मात्र जल एवं अर्घ्य देकर ही प्रसन्न किया जा सकता है।
सूर्य देव को अर्घ्य देते समय, अथवा उनकी साधना करते समय, उनके इन 12 मंत्रों का जाप करने से शीघ्र ही मनचाहा आशीर्वाद मिलता है।
सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत का वरदान पाने के लिए, रविवार के दिन सूर्यदेव को अर्घ्य देते समय इन 12 नामों का जाप पूरी श्रद्धा एवं विश्वास के साथ करना चाहिए।
🚩🚩 ॐ अर्काय नमः 🚩🚩
🚩🚩 जय मां भवानी 🚩🚩
🚩🚩 जय क्षत्रिय धर्म 🚩🚩
🚩🚩 जय राजपुताना 🚩🚩
🚩🚩 जय जय श्री राम 🚩🚩


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